वाह-वाह

बड़े कमाल की चीज है यह और इसकी डिमांड सप्लाई से कहीं ज़्यादा है। 
यह वह कमाल है जो कोयले को हीरा बनाता है। आग बुझा दे ठंडक पहुंचा दे। 
दर्द की दवा बन जाए। इनकम करा दे टूटा दिल जोड़ दे डाइवोर्स का केस निपटा दें 
और न जाने क्या-क्या आज के इलेक्ट्रॉनिक युग में इसकी डिमांड इतनी है कि सप्लाई कम पड़ गई है। 
लोग इसे पाने के लिए क्या-क्या नहीं करते। अनगिनत विधाएं हैं इसके चाहने वालों में ज़रा गौर कीजिए 
तो आपको भी चाहिए और मुझे भी और इसका नाम है, वाह-वाह!

मंदिरों में स्थापित देवी देवता सनातन हो गए। अगर आपने पौराणिक कथाएं सुनी हैं
तो पाया होगा कि एक देवता दूसरे देवता की वाह वाह कर रहे हैं। 
हां, एक शब्द और है इन कथाओं में और वह है स्तुति। वाह वाह तो
विदेशी भाषा भाषा से आया है और स्तुति एकदम देसी है जो इसकी
महिमा जानकर अपने व्यवहार में ले आता है। कामयाब हो जाता है, 
तो ईश्वरी व्यवस्था वाह-वाह पर चल रही है और ऐसे ही चल सकती है। 
व्यवस्था चाहे ईश्वरीय हो, अंतर्राष्ट्रीय हो, राष्ट्रीय हो या आपकी 
प्राइवेट जिंदगी ही क्यों ना हो, ऐसे ही चल सकती है!

चलो पहले एक अंतर्राष्ट्रीय उदाहरण परख लेते हैं। 1971 की भारत 
पाक की लड़ाई में भारत विजयी रहा। इंदिरा गांधी ने पाकिस्तान के 
पीएम भुट्टो को बुला भेजा और भुट्टो को एंग्ज़ाइटी के अटैक होने लगे। 
पता नहीं किस कागज पर साइन करा लें। अभी तो इंदिरा जी देसी वाह वाह लूट रही थी। 
उन्होंने अपने सलाहकारों को बुलाया कि अब क्या करें।
 इंदिरा जी ने बुलाया है। गहन चिंतन के बाद उनके ख़ास सलाहकार ने उनके 
कान में कुछ कह दिया और उनकी एंग्ज़ाइटी एकदम शांत हो गई। 

शिमला में दोनों प्रधानमंत्री आमने-सामने। इससे पहले इंदिरा जी 
कुछ बोले हैं भुट्टो ने वाह-वाह की झड़ी लगा दी। मोहतरमा आप के 
लौंडों ने जो हमारे लौंडों को मारा है, वह बेमिसाल है। 
हालांकि हम जंग हार गए, पर आपकी लीडरशिप और 
आपके फौजी लौंडो की तारीफ करनी होगी और आपकी 
तोलोपचियों क्यों की तो बात ही क्या एक गोला सीधा मेरे 
ऑफिस में गिरा पर मैं बच गया। उसी समय मैंने फौजी 
अफसरों को कहा, किसी सीखो कुछ इंदिरा जी के लौंडों
से इनका निशाना एकदम ठा है और तुमसे एक रायफल भी संभाली नहीं जाती है 
और मैडम आपकी जैसी लीडर की तो पूरी दुनिया को जरूरत है। 
आप इंटरनेशनल वाह वाह डिजर्व करती हैं। अगर आप बुरा ना माने तो मेरी बेटी 
को कुछ दिन अपना जूनियर रख ले। आगे जाकर जाने उसे आपकी नसीहतों का
 कैरियर में फायदा हो जाए। इस बात का फायदा यह हुआ कि भुट्टो साहब की 
वादियों शिमला में खूब खातिर हुई। ऐसी दावत उनकी एक्सपेक्टेशन से ज्यादा कहीं
ज्यादा थी। बातचीत का मुद्दा गोल होकर लुढ़कने लगा। पर इंदिरा जी खुश हो गई। 

चलो एक समझौता कर लेते हैं कि ऐसे समझौते हम करते रहेंगे 
और मुद्दे की बात कभी नहीं करेंगे। इंटरनेशनल मीडिया में आप मेरी तारीफ करेंगे 
और मैं आपकी। ऑफिशियली ही हम आपको कोसेंगे  और आप हमें, 
ना आप सच बोलेंगे और ना हम।तो कुछ इस प्रकार से हो गया शिमला समझौता। 
मियां भुट्टो खुशी-खुशी वापस लौट गए और वापस पाकिस्तान जाकर अपनी देसी 
वाह वाह लूटने लगे। इतना पुर सुकून था उनका यह वाह-वाह सफर कि उनके 
प्राइवेट डॉक्टर ने बताया कि जनाब आपकी छाती का साइज 2 इंच बढ़ गया है और 
आपका वजन 4 किलो।

हिंदी भाषा में दो और शब्द हैं, व्याज स्तुति यानी झूठी वाह वाह और विपरीत स्तुति 
यानी उल्टी वाह वाह,यह कलाएं हमें पुरखो से मिली है। आज के युग में टर्मिनोलॉजी 
बदल गई है। राष्ट्रीय संदर्भ में उदाहरण कुछ इस प्रकार है। भारतवर्ष पिछले 10 - 11 
सालों में वाह-वाह करने और करवाने में विश्व गुरु बन गया है। हमारे शीर्ष नेता 
तो अपनी वाह-वाह स्वयं भी कर लेते हैं। अब सरकारी फरमान है कि कुछ करना 
ही है तो वाह वाह कीजिए और नहीं करना तो चुप रहिए। एक बाबू तो ऐसे भी हैं 
जो बेचारे वाह वाह की कला में गच्चा खा गए। अपनी 34 साल की कैरियर में 57 बार ट्रांसफर हो गए। 
एक रिकॉर्ड होल्डर है यह महानुभाव 
सरकारी कामकाज में वाह-वाह एक संपूर्ण ग्रंथ है और नवनियुक्त बाबू 
को विशेष रूप से प्रशिक्षित किया जाता है। ट्रांसफरी ही बाबू का केस अच्छी तरह पढ़ाया जाता है। 
सरकारी तौर पर वाह वाह केवल मंत्री जी की हो। यह जरूरी नहीं उनके रिश्तेदार उनके 
शिफारशी टट्टू तो छोड़िए साहब उनके पालतू कुत्ते की भी वाह-वाह होनी चाहिए। 
अगर सिफ़ारिशी आगंतुक मंत्री जी का मौखिक रेफरेंस लेकर आया है तो ठीक 
और अगर नहीं तो उसे कैसे निपटाना है एक बुद्धिमत्ता पूर्ण फैसला होता है।
 इसलिए ऊंची सरकारी नौकरी को ब्यूरोक्रेसी कहते हैं।

2014 के बाद टीवी चैनलों को स्पष्ट आदेश हो गया। हमारी वाह-वाह करो, 
अन्यथा बंद हो जाओ या बिक जाओ।  सरकारी वाह-वाह ज़ोर ज़ोर से टीवी पर चलाओ 
और बदले में सरकारी मलाई खाओ।  जो चैनल वाह वाह नहीं करते, वह यूट्यूब 
पर विपरीत स्तुति करते नज़र आते हैं। हिंदी साहित्य में आलोचना को विपरीत स्तुति  कहा जाता है। 
रोज़ी रोटी के लिए वाह-वाह तो सभी को चाहिए। कुल मिलाके मामला यूं है कि 
वाह वाह के मामले में सरकारी लठ्ठ का प्रयोग कुशलतापूर्वक हो रहा है। 
वाह वाह, एक सरकारी जरूरत है। 

अब मैं आता हूं। एक आम भारतीय की प्राइवेट सत्ता पर यानी आपका घर यहां 
लट्ठ का प्रयोग नहीं हो सकता। भाषा में शब्द विवाह एक संपूर्ण व्याख्या।
गौर से देखें तो इसमें वाह शब्द जुड़ा है। रीति रिवाज में विवाह की रस्में दो घरों में होती है। 
 दो परिवार यानी वर और वधु, को वाह वाह नाम के तंबू में लाकर रस्में पूरी कर 
अपने अपने घर लौट जाते हैं। तो नव दंपत्ती इस मर्म को समझ जाते हैं। 
जीवन भर एक दूसरे की वाह-वाह कर परम सुखी रहते हैं। 
सीनियर वैवाहिक जोड़ों को यह कि यह ड्यूटी बनती है कि जूनियर्स को समझा जाए 
अन्यथा वाह वाह पर चलती गाड़ी अपने चरम अर्थ यानी आह आह आह पर आकर रुक जाती है। 
यूं समझिए कि निकाह शब्द जो उर्दू में है, उसमें आह छुपा है। 
अतः हिंदी भाषा के नाम का जयकारा लगाईए विवाह शब्द में जो सार छुपा है, 
समझिए और समझाइए। वो जोड़े जो विवाह के बदले लव मैरिज करते हैं। 
अक्सर डाइवोर्स के वकीलों की वाह-वाह करते फिरते हैं। फिर भी अगर 
आप डाइवोर्स का केस लड़ रहे हैं तो एक बार वाह-वाह का फार्मूला जरूर ट्राई करें 
पर सोच विचार कर। आपका वकील आपको यह सलाह कभी नहीं देगा 
क्योंकि वह खुद अपने घर में वाह-वाह की बजाय कानूनबाज़ी करता है 
तो आप स्वयं अंदाजा लगा सकते हैं। वाह वाह की कला सीखिए, खुद सुखी 
रहिए और दूसरों को भी रखिए। इलेक्ट्रॉनिक युग  में यूट्यूब का उदय हुआ 
और वाह वाह का नया नाम हो गया लाइक और सब्सक्राइब,
 कोई ऐसा यूट्यूबर नहीं है जो लाइक सब्सक्राइब नहीं चाहता। सभी को चाहिए 
जो ज्यादा से ज्यादा लाइक और सब्सक्राइब पा लेता है। उसे लक्ष्मी देवी के दुर्लभ दर्शन होने लगते हैं। 

किस्सा यूं है कि गब्बर सिंह जब सज़ा काट के जेल से छूटा तो यूट्यूब पर उसने 
एक भक्ति चैनल शुरू कर दिया। अब क्योंकि बच्चा बच्चा उसे जानता है तो 
उसे लाइक सब्सक्राइब नहीं मिले। उसका धैर्य समाप्त हो चला तो उसने पुराना 
फार्मूला इस्तेमाल किया। अपने पट्ठों को गांव गांव भेज दिया कि गब्बर का 
भक्ति चैनल लाइक सब्सक्राइब करो नहीं तो गब्बर आ जाएगा और कामयाब हो गया। 
ख़ुद फैसला करें कि आपको वाह वाह चाहिए या नए जमाने की लाइक सब्सक्राइब। 
जाते जाते एक सलाह देता जा रहा हूं। एक रुमाल लीजिए। और उस पर एक पर्ची बांध लीजिए। 
उस पर्ची पर वाह-वाह लिखिये। पर्ची को रुमाल में रख के गांठ लगाइए पर अपनी जेब में रखे 
ऐसे ही एक टोटका यानी गांठ युक्त रूमाल अपने लाइफ पार्टनर को भी दीजिए, 
ताकि आपको याद रहे कि आज कल परसो ना जाने कब तक जब तक हो सके, वाह-वाह करनी है। 
और कुछ न भी हो, पर बुरी नज़र से बचे रहेंगे, सुखी रहेंगे।

जाते-जाते मेरी वाह-वाह लेते जाइए और अपनी वाह वाह देते जाइए।